दोस्तों क्या जिंदगी ऐसे ही धक्का मार चलेगी,क्या कभी नहीं बदलेगी जिंदगी?कभी पहाड़ो पर झिलमिलाती धूप की तरह, तो कभी बरसते हुए बादलों की चाल की तरह,क्या कभी नहीं बदलेगी जिंदगी?कभी आसमान में छुपते निकलते तारों की तरह,तो कभी आँधियों में उड़ते उस समा की तरह क्या कभी नहीं बदलेगी जिंदगी?कभी गरजते हुए बादलों की तरह,तो कभी उठते हुए भवंडर की तरह क्या कभी नहीं बदलेगी जिंदगी?कभी उस रोते हुए नन्हे बालक की तरह,तो कभी उस सहमी हुई जान की तरह क्या कभी नहीं बदलेगी जिंदगी?क्यों ना बदलेगी जिंदगी हर हाल में बदलेगी ये जिंदगी!रोशन हुए दिए की तरह,सूरज के प्रकाश की तरह,तो कभी आई हुई ख़ुशी की तरह अब बदलेगी जिंदगी! कभी दौड़ते हुए उस धावक की तरह,तो कभी गिरकर उठते हुए उस शेयर की तरह अब बदलेगी जिंदगी हर हाल में!!

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