Ek sach ..

Zindagi ka ek sach ye bhi hai jisme aane wale har ek insaan ko yahn se vida leni hogi

Chahe uska man kare ya na kare

Vo khud jana chahe ya jabran use yahan se vida kiya jaye , jana to pdega hi .. !

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जिंदगी

​आज इतने दिनों बाद कुछ लिखा है अच्छा है या बुरा है ये तो पढ़ने के बाद ही पता चलेगा तो प्रस्तुत है”जिंदगी जीना सीख जाओगे”~

जीना भी एक जिंदगी है

अच्छी हो या बुरी हो

पर जीना ही तो जिंदगी है

जिंदगी को हर कोई अपने तरीके से जीता है

पर जिंदगी कैसे जियेंगे ये तो जीने वाला ही जानता है |

क्या जिंदगी है?

कभी गिरते-पड़ते उठने पर

कभी उठते-बैठते लड़ने पर 

हर किसी को खुश रखने के लिए 

जीना ही तो जिंदगी है |

पर ना जाने क्यों?

कोई जीना मतलब जीना समझता है

तो कोई चुपके से जीने में जाकर 

जीने को जीना समझता है

पर जिंदगी जीना तो जीने जैसी है

चढ़ोगे तो जीना सार्थक है

वरना वो जीना तो वैसा ही जीना बना रहने वाला है |

जीना चाहो तो जीने के स्वभाव को अपनाओ

जीने में जीने के पुट को आजमाओ

जीना जीने से जीना जीने जैसा 

कहीं बेहतर जीना होगा |

पर जिंदगी को कैसी भी जिओ है तो वो आखिर अपनी जिंदगी ही बस जीने को जीते रहो 

जिंदगी जीना सीख जाओगे |

धन्यवाद!!

  तन्मय आत्मन् जैन

गंतव्य

जिंदगी में हर कोई मुसाफिर बनके आता है और मुसाफिर बने ही चला जाता है फर्क है तो सिर्फ इतना कि कोई जिंदगी का सफर तय करने के लिए अपने गंतव्य तक पहुँचना चाहता है दर दर की ठोकरों के बाद भी वह उस गंतव्य पर जाना चाहता है जहां जिंदगी की तलाश खत्म होती है ऐसा स्थान जहाँ पहुँचने के बाद कभी कहीं और भटकना नहीं पड़ता। पर जो मुसाफिर तो थे किन्तु गंतव्य पर जाना चाहते थे वह अपने उस स्थान से भटकने के कारण  गंतव्य से विमुख हो गए और मुसाफिर,परदेशी ही बने रह गए वो कठिनाइयों से लड़ ना सके।अपनी जिन्दगी बिन कठनाइयों के बिन गंतव्य पे पहुँचे संसार के चका चोंध में बिता दिए।और अनन्त कल तक उस मायारूपी जंजाल स्वरूप संसार में ही रखड़ते रहे।

दुनियाँ

कुछ अच्छा कर लोगे तो दुनियाँ याद रखती है,वरना क्या है आने जाने वालों की तो संख्या बहुत सारी है!