क्या जनसंख्या बेरोजगारी का कारण है?

काफी अच्छे से आंकड़ों को दर्शाया गया है। अच्छा लिखा है, काम का लिखा है। एतदर्थ बधाइयां 💐

अnubhav शास्त्री

  • अनुभव शास्त्री
  • बीए. एमए. [ मुम्बई यूनिवर्सिटी में अध्ययनरत ]

हाँ हम बेरोजगार हैं।

चूँकि मैं एक भारतीय हूँ इसलिए भारत की मुख्यता से अपनी बात रखूँगा। वर्तमान के हालातों को देख कर ऐसा लगता है कि मानों भारत बेरोजगारी का केंन्द्र सा बन गया है। आज देश जिन हालातों से गुजर रहा है उनको देखकर यह कहना गलत न होगा कि आने वाले कुछ दशकों में देश की अर्थव्यवस्था बहुत ही निचले स्तर पर होगी। राष्ट्रीय कौशल विकास निगम की रिपोर्ट के मुताबिक कोर सेक्टर के 92% इंजीनियर रोजगार के लिए प्रशिक्षित नही हैं। साल 2015 में 1,50,000 से भी ज्यादा इंजीनियर जिन्होंने 650 कॉलेजों से शिक्षा प्राप्त की वे बेरोजगार हैं। एक और रिपोर्ट के मुताबिक देश के कुल 7% एमबीए स्नातक ही रोजगार योग्य हैं। निम्न खबरों ने तो देश को और भी ज्यादा चिंता में डाल दिया था।

100 में से 20 नहीं रोजगार लायक।

चपरासी…

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जिंदगी

​आज इतने दिनों बाद कुछ लिखा है अच्छा है या बुरा है ये तो पढ़ने के बाद ही पता चलेगा तो प्रस्तुत है”जिंदगी जीना सीख जाओगे”~

जीना भी एक जिंदगी है

अच्छी हो या बुरी हो

पर जीना ही तो जिंदगी है

जिंदगी को हर कोई अपने तरीके से जीता है

पर जिंदगी कैसे जियेंगे ये तो जीने वाला ही जानता है |

क्या जिंदगी है?

कभी गिरते-पड़ते उठने पर

कभी उठते-बैठते लड़ने पर 

हर किसी को खुश रखने के लिए 

जीना ही तो जिंदगी है |

पर ना जाने क्यों?

कोई जीना मतलब जीना समझता है

तो कोई चुपके से जीने में जाकर 

जीने को जीना समझता है

पर जिंदगी जीना तो जीने जैसी है

चढ़ोगे तो जीना सार्थक है

वरना वो जीना तो वैसा ही जीना बना रहने वाला है |

जीना चाहो तो जीने के स्वभाव को अपनाओ

जीने में जीने के पुट को आजमाओ

जीना जीने से जीना जीने जैसा 

कहीं बेहतर जीना होगा |

पर जिंदगी को कैसी भी जिओ है तो वो आखिर अपनी जिंदगी ही बस जीने को जीते रहो 

जिंदगी जीना सीख जाओगे |

धन्यवाद!!

  तन्मय आत्मन् जैन

गंतव्य

जिंदगी में हर कोई मुसाफिर बनके आता है और मुसाफिर बने ही चला जाता है फर्क है तो सिर्फ इतना कि कोई जिंदगी का सफर तय करने के लिए अपने गंतव्य तक पहुँचना चाहता है दर दर की ठोकरों के बाद भी वह उस गंतव्य पर जाना चाहता है जहां जिंदगी की तलाश खत्म होती है ऐसा स्थान जहाँ पहुँचने के बाद कभी कहीं और भटकना नहीं पड़ता। पर जो मुसाफिर तो थे किन्तु गंतव्य पर जाना चाहते थे वह अपने उस स्थान से भटकने के कारण  गंतव्य से विमुख हो गए और मुसाफिर,परदेशी ही बने रह गए वो कठिनाइयों से लड़ ना सके।अपनी जिन्दगी बिन कठनाइयों के बिन गंतव्य पे पहुँचे संसार के चका चोंध में बिता दिए।और अनन्त कल तक उस मायारूपी जंजाल स्वरूप संसार में ही रखड़ते रहे।

दुनियाँ

कुछ अच्छा कर लोगे तो दुनियाँ याद रखती है,वरना क्या है आने जाने वालों की तो संख्या बहुत सारी है!

जिंदगी

जिंदगी में कितना कुछ सहना पड़ता है,अगर जिंदगी में बिना कुछ सहे ही कुछ मिल जाए तो कोई भला क्यों सहेगा थोड़ा कुछ, सच तो यही है दोस्तों चाहे कोई अभी माने या वर्षों बाद!

क्या कभी नहीं बदलेगी??

दोस्तों क्या जिंदगी ऐसे ही धक्का मार चलेगी,क्या कभी नहीं बदलेगी जिंदगी?कभी पहाड़ो पर झिलमिलाती धूप की तरह, तो कभी बरसते हुए बादलों की चाल की तरह,क्या कभी नहीं बदलेगी जिंदगी?कभी आसमान में छुपते निकलते तारों की तरह,तो कभी आँधियों में उड़ते उस समा की तरह क्या कभी नहीं बदलेगी जिंदगी?कभी गरजते हुए बादलों की तरह,तो कभी उठते हुए भवंडर की तरह क्या कभी नहीं बदलेगी जिंदगी?कभी उस रोते हुए नन्हे बालक की तरह,तो कभी उस सहमी हुई जान की तरह क्या कभी नहीं बदलेगी जिंदगी?क्यों ना बदलेगी जिंदगी हर हाल में बदलेगी ये जिंदगी!रोशन हुए दिए की तरह,सूरज के प्रकाश की तरह,तो कभी आई हुई ख़ुशी की तरह अब बदलेगी जिंदगी! कभी दौड़ते हुए उस धावक की तरह,तो कभी गिरकर उठते हुए उस शेयर की तरह अब बदलेगी जिंदगी हर हाल में!!